बैतूल जिले में शनिवार को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के शिविरों में 806 गर्भवती महिलाओं की जांच की गई। इनमें से 396 महिलाओं को हाई रिस्क यानी ऐसी श्रेणी में चिन्हित किया गया, जिनकी गर्भावस्था में जटिलता की आशंका ज्यादा रहती है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज कुमार हुरमाड़े के मुताबिक शिविर में 55 महिलाओं की सोनोग्राफी भी की गई।

जांच सिर्फ जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रही। शिविर जिला चिकित्सालय बैतूल के साथ-साथ आठनेर, मुलताई, सेहरा, चिचोली, प्रभात पट्टन, भैंसदेही, घोड़ाडोंगरी और शाहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों, आमला के सिविल अस्पताल और बैतूल के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर एक साथ लगाए गए। हर जगह स्त्री रोग विशेषज्ञ या महिला चिकित्सक ने जांच की।

किस केंद्र पर कितनी जांच

जिला चिकित्सालय बैतूल में स्त्री रोग चिकित्सक डॉ. संगीता उइके ने 80 गर्भवती महिलाओं की जांच की, जिनमें 23 हाई रिस्क मिलीं। सोनोग्राफी की सभी 55 जांचें यहीं हुईं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सेहरा में डॉ. कविता सिमैया ने सबसे ज्यादा 150 महिलाओं की जांच की, जिनमें 41 हाई रिस्क चिन्हित हुईं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चिचोली का आंकड़ा ध्यान खींचता है — यहां डॉ. माधुरी अखण्डे ने 76 महिलाओं की जांच में 71 को हाई रिस्क पाया। शाहपुर में डॉ. महिमा सिंह ने 81 में से 39, मुलताई में डॉ. सरिता कालभोर ने 79 में से 38 और घोड़ाडोंगरी में डॉ. कविता कोरी ने 56 में से 40 महिलाओं को हाई रिस्क श्रेणी में रखा।

भैंसदेही में डॉ. अभिषेक भलावी ने 69 महिलाओं की जांच की और 37 हाई रिस्क मिलीं। आठनेर में डॉ. ज्योति इवने ने 52 में से 30, आमला के सिविल अस्पताल में डॉ. वैशाली ने 34 में से 11 और प्रभात पट्टन में डॉ. सोनाली मरकाम ने 27 में से 16 महिलाओं को हाई रिस्क चिन्हित किया। बैतूल के शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और खेड़ी सांवलीगढ़ में डॉ. माधुरी आर्य काकोडिया तथा डॉ. तनीषा महाले ने मिलकर 50 महिलाओं की जांच की, जिनमें 19 हाई रिस्क रहीं।

खून और शुगर की जांच सबकी

शिविर में आई हर गर्भवती महिला की खून की जांच और जीडीएम यानी गर्भावस्था के दौरान होने वाले मधुमेह की जांच की गई। खून की कमी और गर्भकालीन मधुमेह, दोनों ही ऐसी स्थितियां हैं जो समय पर पकड़ में आ जाएं तो प्रसव के समय होने वाला खतरा काफी घट जाता है। हाई रिस्क चिन्हित होने का मतलब बीमारी नहीं, बल्कि यह है कि उस महिला को आगे की गर्भावस्था में खास निगरानी और फॉलोअप की जरूरत है।

हर महीने दो तारीखें तय

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर महीने की 9 और 25 तारीख को यह शिविर लगाया जाता है। इसका मकसद प्रसव से पहले जरूरी जांच, चिकित्सकीय परीक्षण और परामर्श देना तथा हाई रिस्क महिलाओं का सही प्रबंधन कर संस्थागत और सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित करना है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर घटाई जा सके।

जिन गर्भवती महिलाओं की अब तक जांच नहीं हुई है, वे अगली निर्धारित तारीख को अपने नजदीकी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल या जिला चिकित्सालय में लगने वाले शिविर में पहुंचकर निःशुल्क जांच और परामर्श ले सकती हैं।