उज्जैन के नर्सिंग कॉलेज में गुरुवार को चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ के लिए एचआईवी-एड्स तथा क्षयरोग पर सघन जागरूकता प्रशिक्षण हुआ। इसमें संक्रमण से बचाव, स्क्रीनिंग, जांच, निःशुल्क परामर्श और उपचार से जुड़ी जानकारी दी गई।
प्रशिक्षण जिला क्षयरोग अधिकारी डॉ. अरुण कुशवाहा और दिशा क्लस्टर की शोभी गुप्ता ने दिया। आयोजन मध्य प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण समिति के निर्देश और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार पटेल के मार्गदर्शन में हुआ।
गर्भावस्था के दौरान जांच पर विशेष चर्चा
उपस्थित स्टाफ को बताया गया कि गर्भावस्था की पहली तिमाही में एचआईवी और वीडीआरएल की जांच कराना आवश्यक है। तीन माह बाद दोबारा स्क्रीनिंग कराने की जानकारी भी दी गई।
सत्र में गर्भावस्था के दौरान एचआईवी के साथ हाई रिस्क प्रेग्नेंसी, एनीमिया प्रबंधन, क्षयरोग और रक्तदान से जुड़े विषय शामिल रहे। एचआईवी-एड्स के चार प्रमुख कारणों और बचाव के उपायों पर भी जानकारी साझा की गई।
भेदभाव पर रोक और कानूनी प्रावधान समझाए
एचआईवी-एड्स एक्ट 2017 पर चर्चा करते हुए बताया गया कि एचआईवी प्रभावित व्यक्तियों के साथ किसी भी तरह का भेदभाव वर्जित है। नियमों के उल्लंघन पर दंड के प्रावधानों की जानकारी भी दी गई।
प्रशिक्षणार्थियों को एचआईवी-एड्स संबंधी परामर्श और सहायता के लिए टोल फ्री हेल्पलाइन 1097 के बारे में बताया गया। जिला क्षयरोग नियंत्रण कार्यक्रम के स्टाफ ने भी आयोजन में सहयोग किया।
आयोजकों ने स्वास्थ्यकर्मियों से प्रशिक्षण में मिली जानकारी के आधार पर समुदाय में जागरूकता बढ़ाने और समय पर जांच, परामर्श तथा उपचार सुनिश्चित कराने में भूमिका निभाने को कहा।




